Meaning of

बख्श

bakhsh • بخش

प्रदान करना; क्षमा करना; देना

grant; forgive; bestow

عطا کرنا; معاف کرنا; دینا

Persian

ख़ुदा ने ये सिफ़त दुनिया की हर औरत को बख़्शी है कि वो पागल भी हो जाए तो बेटे याद रहते हैं — Munawwar Rana
ज़िन्दगी छीन ले बख़्शी हुई दौलत अपनी तू ने ख़्वाबों के सिवा मुझ को दिया भी क्या है — Akhtar Saeed Khan
तेरे हसीन तसव्वुर को सामने ला कर शब-ए-फ़िराक़ को बख़्शी है चाँदनी मैं ने — Saba Afghani
अब ख़ुदा नेमतें हमें बख़्शे चाँद जैसी हमारी बेग़म हो — Amaan Pathan
छू लेने दो नाज़ुक होंठों को, कुछ और नहीं हैं जाम हैं ये क़ुदरत ने जो हम को बख़्शा है, वो सब सेे हसीं ईनाम हैं ये — Sahir Ludhianvi
बख़्शी हैं हम को इश्क़ ने वो जुरअतें 'मजाज़' डरते नहीं सियासत-ए-अहल-ए-जहाँ से हम — Asrar Ul Haq Majaz
ये भी ए'जाज़ मुझे इश्क़ ने बख़्शा था कभी उस की आवाज़ से मैं दीप जला सकता था — Ahmad Khayal
ज़मीं को तर-ब-तर करने किसी दिन आएगा बादल न जाने किन ग़रीबों के घरों को खाएगा बादल सितारे नोच लाऊँगा किसी दिन ज़िद पे आया तो अभी ग़र्दिश में हूँ यारों बहुत इतराएगा बादल ये सारी मछलियाँ जब बद-दुआ देने लगेंगी तब समुंदर प्यास से तड़पेगा और मर जाएगा बादल कहीं पर कम कहीं ज़्यादा ये कैसा फ़ैसला तेरा सॅंभल जा वक़्त है वरना बहुत पछताएगा बादल मुनाफ़िक़ है ये रातों का किसी को भी नहीं बख़्शा जवानी ज़ुल्फ़ आँखें और क्या-क्या खाएगा बादल हमीं हैं जो तुझे सर पे चढ़ाकर फिरते रहते हैं कुशादा ज़र्फ़ कर लें हम तो क्या टिक पाएगा बादल — "Nadeem khan' Kaavish"

'बख्श' शब्द उदारता और दया की भावना को वहन करता है। कविता में, यह अक्सर बिना अपेक्षा के क्षमा करने और देने की दिव्य या मानवीय क्रिया को दर्शाता है, जो अनुग्रह और परोपकार का संकेत है।

कवि 'बख्श' का उपयोग क्षमा और उदारता के विषयों का पता लगाने के लिए करते हैं। यह अक्सर प्रतिशोध और नाराजगी के विपरीत होता है, दया की परिवर्तनकारी शक्ति को उजागर करता है। यह दिव्य अनुग्रह या मानवीय दया का प्रतीक हो सकता है।

कविता में, 'बख्श' क्षमा की शक्ति की एक कोमल याद दिलाता है। यह दिल की चंगा करने की क्षमता और आत्मा की करुणा की क्षमता को संबोधित करता है।