Meaning of

बद्र

badr • بدر

पूर्णिमा; चमक

full moon; brightness

چودھویں کا چاند; چمک

Arabic

सुना है बद्र साहब महफ़िलों की जान होते थे बहुत दिन से वो पत्थर हैं न हँसते हैं न रोते हैं — Bashir Badr
अब क्यूँँ अमान ढूँढ़ते हैं उस को दर-ब-दर जिस को निकाल फेंक चुके ज़िंदगी से हम — Amaan Pathan
दर से तेरे जो निकले हम, फिर भटके कूचे कूचे में फिर दर-ब-दर हुए सनम, तेरी गली में मर गए — Pritesh Bunker
किसे है वक़्त मोहब्बत में दर-ब-दर भटके मैं उस के शहर गया था किसी ज़रूरत से — Riyaz Tariq
दर-ब-दर ठोकरें खाईं तो ये मालूम हुआ घर किसे कहते हैं क्या चीज़ है बे-घर होना — Saleem Ahmad
क्यूँ तेरी कल्पना मैं करूँ उम्रभर क्यूँ तेरी वेदना में फिरूॅं दर-ब-दर — Manish Yadav

बद्र पूर्णिमा की चमकदार सुंदरता को दर्शाता है, जो अक्सर पूर्णता और संपूर्णता का प्रतीक होता है। कविता में, यह चांदनी रात की शांत और उज्ज्वल विशेषताओं को प्रकट करता है।

कवि इसे प्रिय के चेहरे की सुंदरता का वर्णन करने या पूर्णिमा की रात की शांति को व्यक्त करने के लिए उपयोग करते हैं।

बद्र खगोलीय सुंदरता के शाश्वत आकर्षण को दर्शाता है।