Meaning of

बद्र

badr • بدر

पूर्णिमा; चमक

full moon; brightness

چودھویں کا چاند; چمک

Arabic

मैं शजर तुम को भूल जाऊँगी
रोज़ कहती थी बात बात पे जो

पागलों की तरह भटकती है
दर-ब-दर अब मेरी तलाश में वो

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सुना है बद्र साहब महफ़िलों की जान होते थे
बहुत दिन से वो पत्थर हैं न हँसते हैं न रोते हैं

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कहीं से दुख तो कहीं से घुटन उठा लाए
कहाँ-कहाँ से न दीवानापन उठा लाए

अजीब ख़्वाब था देखा के दर-ब-दर हो कर
हम अपने मुल्क से अपना वतन उठा लाए

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क्या बताऊँ कैसा ख़ुद को दर-ब-दर मैं ने किया
उम्र भर किस किस के हिस्से का सफ़र मैं ने किया

तू तो नफ़रत भी न कर पाएगा इस शिद्दत के साथ
जिस बला का प्यार तुझ सेे बे-ख़बर मैं ने किया

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किसे है वक़्त मोहब्बत में दर-ब-दर भटके
मैं उस के शहर गया था किसी ज़रूरत से

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है क़ब्र यूँँ बेचैन अब मेरी निगाह को
माँ देखती हो जैसे कि बेटे की राह को

तू ढूँढ़ता फिरता है जो सहरा में बस्तियाँ
मैं दर-ब-दर फिरता रहा तेरी पनाह को

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दर-ब-दर ठोकरें खाईं तो ये मालूम हुआ
घर किसे कहते हैं क्या चीज़ है बे-घर होना

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अब क्यूँँ अमान ढूँढ़ते हैं उस को दर-ब-दर
जिस को निकाल फेंक चुके ज़िंदगी से हम

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क्यूँ तेरी कल्पना मैं करूँ उम्रभर
क्यूँ तेरी वेदना में फिरूॅं दर-ब-दर

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दर से तेरे जो निकले हम, फिर भटके कूचे कूचे में
फिर दर-ब-दर हुए सनम, तेरी गली में मर गए

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मैं शजर तुम को भूल जाऊँगी
रोज़ कहती थी बात बात पे जो

पागलों की तरह भटकती है
दर-ब-दर अब मेरी तलाश में वो

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सुना है बद्र साहब महफ़िलों की जान होते थे
बहुत दिन से वो पत्थर हैं न हँसते हैं न रोते हैं

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बद्र पूर्णिमा की चमकदार सुंदरता को दर्शाता है, जो अक्सर पूर्णता और संपूर्णता का प्रतीक होता है। कविता में, यह चांदनी रात की शांत और उज्ज्वल विशेषताओं को प्रकट करता है।

कवि इसे प्रिय के चेहरे की सुंदरता का वर्णन करने या पूर्णिमा की रात की शांति को व्यक्त करने के लिए उपयोग करते हैं।

बद्र खगोलीय सुंदरता के शाश्वत आकर्षण को दर्शाता है।