Meaning of

बय्यत

bayyat • بیت

शेर; दोहा

verse; couplet

شعر; دوہا

Arabic

आज इक और बरस बीत गया उस के बग़ैर जिस के होते हुए होते थे ज़माने मेरे — Ahmad Faraz
बे-नाम सा ये दर्द ठहर क्यूँँ नहीं जाता जो बीत गया है वो गुज़र क्यूँँ नहीं जाता — Nida Fazli
कुछ लोग ख़यालों से चले जाएँ तो सोएँ बीते हुए दिन रात न याद आएँ तो सोएँ — Habib Jalib
आप पहलू में जो बैठें तो सँभल कर बैठें दिल-ए-बेताब को आदत है मचल जाने की — Jaleel Manikpuri
हर धड़कते पत्थर को लोग दिल समझते हैं 'उम्रें बीत जाती हैं दिल को दिल बनाने में — Bashir Badr
एक बरस और बीत गया कब तक ख़ाक उड़ानी है — Vikas Sharma Raaz
बे-ख़ुदी में ले लिया बोसा ख़ता कीजे मुआ'फ़ ये दिल-ए-बेताब की सारी ख़ता थी मैं न था — Bahadur Shah Zafar
मुझे तो उस का भीतरी ग़ुबार है निकालना सो आँख चूमता हूँ उस के होंठ चूमता नहीं — Siddharth Saaz

'बय्यत' मूल रूप से कविता की एक इकाई को संदर्भित करता है, जो अक्सर एक संपूर्ण विचार या भावना को समेटे हुए होता है। कविता में, यह गहन अभिव्यक्ति का माध्यम बन जाता है, जहाँ प्रत्येक पंक्ति अकेले खड़ी हो सकती है, फिर भी एक बड़े संपूर्ण का हिस्सा होती है।

कवि अक्सर 'बय्यत' का उपयोग स्पष्टता के क्षण या गहन भावना को समेटने के लिए करते हैं। यह ग़ज़लों और अन्य काव्य रूपों में एक निर्माण खंड के रूप में कार्य करता है, जहाँ प्रत्येक शेर एक विशिष्ट विषय को व्यक्त कर सकता है।

कविता की दुनिया में, 'बय्यत' संक्षिप्तता और गहराई की शक्ति का प्रमाण है।