Meaning of

बर्क़

barq • فکر آشیاں

बिजली; अचानक चमक; प्रेरणा

lightning; sudden brilliance; inspiration

بجلی; اچانک چمک; الہام

Arabic

हज़ार बर्क़ गिरे लाख आँधियाँ उट्ठें वो फूल खिल के रहेंगे जो खिलने वाले हैं — Sahir Ludhianvi
किसी की बर्क़-ए-नज़र से न बिजलियों से जले कुछ इस तरह की हो ता'मीर आशियाने की — Anwar Taban
तुझी को देखूँगा जब तक हैं बरक़रार आँखें मिरी नज़र न फिरेगी तिरी नज़र की तरह — Meer anees
तुम्हारा ज़िक्र कभी हो तो मेरी आँखों में भले हो दर्द ज़ियादा प बर्क़ दिखती है — Rohit tewatia 'Ishq'
जहाँ पे बर्क़ चमकती है उस जगह अक्सर कई निशान हमें तीरगी के मिलते हैं — Kaif Uddin Khan
मेरे रश्क-ए-क़मर तू ने पहली नज़र जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया बर्क़ सी गिर गई काम ही कर गई आग ऐसी लगाई मज़ा आ गया — Fana Bulandshahri
बर्क़-ए-फ़ना भी खाए जहाँ ठोकरें 'फ़िराक़' राह-ए-वफ़ा में आते हैं ऐसे मक़ाम भी — Firaq Gorakhpuri
हो बरक़रार हुस्न पे रौनक़ शबाब और मय — RAAHI

'बर्क़' शब्द बिजली की क्षणिक और चमकदार प्रकृति को पकड़ता है। कविता में, यह अचानक प्रेरणा या क्षणिक चमक के प्रतीक के रूप में उभरता है। यह कुछ शक्तिशाली लेकिन क्षणभंगुर की भावना को जागृत करता है, एक चिंगारी जो क्षण भर के लिए अंधकार को रोशन करती है।

कवि अक्सर 'बर्क़' का उपयोग विचार या भावना की अचानकता को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह सौंदर्य की क्षणभंगुरता या प्रेम की त्वरित प्रहार का प्रतिनिधित्व कर सकता है। यह शब्द स्थायित्व के विपरीत है, क्षणभंगुरता में सौंदर्य को उजागर करता है।

शब्दों के नृत्य में, 'बर्क़' उन क्षणों में पाए जाने वाले सौंदर्य की याद दिलाता है जो बहुत जल्दी बीत जाते हैं।