चाँदनी की तरह तुम, चमकते रहोफूल बनकर के गुलशन में खिलते रहोहै दुआ, दे ख़ुदा, ख़ूब बरक़त तुम्हेंआई दिन यूँ ही आशिक़ बदलते रहो— Abhishek Srivastava virral