Meaning of

बर्ग़

barg • برق

पत्ता; पर्ण; पृष्ठ

leaf; foliage; page

پتہ; پتی; صفحہ

Persian

हज़ार बर्क़ गिरे लाख आँधियाँ उट्ठें वो फूल खिल के रहेंगे जो खिलने वाले हैं — Sahir Ludhianvi
कभी यक-ब-यक तवज्जोह कभी दफ़अ'तन तग़ाफ़ुल मुझे आज़मा रहा है कोई रुख़ बदल बदल कर — Shakeel Badayuni
मेरे रश्क-ए-क़मर तू ने पहली नज़र जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया बर्क़ सी गिर गई काम ही कर गई आग ऐसी लगाई मज़ा आ गया — Fana Bulandshahri
किसी की बर्क़-ए-नज़र से न बिजलियों से जले कुछ इस तरह की हो ता'मीर आशियाने की — Anwar Taban
वालिद तिरा है ज़ुल्म हम पर कर रहा यूँँ भेजकर बाज़ार बुर्के में तुझे — Kuldeep Tripathi KD

'बर्ग़' का मूल अर्थ पत्ता या पर्ण है, और कविता में यह अक्सर विकास, नवीनीकरण और प्रकृति के चक्रों का प्रतीक होता है। यह जीवन की नाजुक सुंदरता और इसके साथ आने वाले अनिवार्य परिवर्तन को दर्शाता है।

कवि 'बर्ग़' का उपयोग प्रकृति की क्षणभंगुर सुंदरता पर विचार करने के लिए करते हैं। यह जीवन की नाजुकता और दृढ़ता दोनों का प्रतिनिधित्व कर सकता है। पत्तियों के मुड़ने और गिरने की छवि एक सामान्य रूपक है।

'बर्ग़' जीवन की क्षणभंगुर सुंदरता का सार पकड़ता है, प्रकृति के अनंत चक्र का प्रमाण है।