चारा-गर ऐ चारा-गर चिल्लाती थीज़ख़्मों को भी हाथ नहीं लगवाती थीपता नहीं कैसा माहौल था उस के घरबुर्का पहन के शर्टें लेने आती थी— Zia Mazkoor