Meaning of

बह्र

bahr • بحر

छंद; लय

meter; rhythm

بحر; لَے

Arabic

मैं बहर-हाल ख़राबी पे ही ख़ुश हूँ अपनी
क्या करेगा तू भला मेरा भला रहने दे

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क़फ़स उदास है यारों सबास कुछ तो कहो
कहीं तो बहर-ए-ख़ुदा आज ज़िक्र-ए-यार चले

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इतनी सर्दी है कि मैं बाँहों की हरारत माँगूँ
रुत ये मौज़ूँ है कहाँ घर से निकलने के लिए

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अपने इस दिल को पत्थर कर लेंगे
हम ख़ुद को तुझ से कमतर कर लेंगे

दुनिया बहरी हो जाएगी इक दिन
इतनी ख़ामोशी अंदर कर लेंगे

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उस को देखा तभी ख़ुदा ने लफ़्ज़ जमाल ईजाद किया
वो बोली तो बहरो ने भी सुन-सुन कर इरशाद किया

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रदीफ़ो-क़ाफ़िया-ओ-बह'र का भी इल्म है लाज़िम
फ़क़त दिल टूट जाने से कोई शाइ'र नहीं बनता

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बे-बहर जुमलों को ग़ज़ल कहते हो तुम
हर्फ़-ए-ग़लत है ये तो मैं कहता रहा

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फूलों की दुकान गए हम और गुलाब को देखा देख के छोड़ दिया
या'नी इन आँखों ने फिर आप के ख़्वाब को देखा देख के छोड़ दिया



बह्र-ए-मीर-(22×9)

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आजकल कुछ भी सुनाई क्यूँँ नहीं देता हमें
हम ही बहरे हो गए या चुप लगा बैठा है वो

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आज एक दूजे को छोड़ जाना है हम ने
आओ आख़िरी बारी शहर साथ में देखें



Behr: 212 1222 212 1222

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मैं बहर-हाल ख़राबी पे ही ख़ुश हूँ अपनी
क्या करेगा तू भला मेरा भला रहने दे

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क़फ़स उदास है यारों सबास कुछ तो कहो
कहीं तो बहर-ए-ख़ुदा आज ज़िक्र-ए-यार चले

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कविता में, 'बह्र' उस लयबद्ध संरचना को संदर्भित करता है जो कविता को उसकी संगीतात्मक गुणवत्ता देती है। यह एक पद्य का दिल की धड़कन है, जो शब्दों के प्रवाह और गति को मार्गदर्शन करता है।

कवि अपने कार्य के भावनात्मक प्रभाव को बढ़ाने के लिए 'बह्र' का सावधानीपूर्वक चयन करते हैं। यह चुनी गई लय के आधार पर, तात्कालिकता, शांति, या उदासी की भावना को जागृत कर सकता है।

'बह्र' कविता की आत्मा का मौन वास्तुकार है, जो अदृश्य लय के धागों से इसके भावनात्मक परिदृश्य को आकार देता है।