Meaning of

बह्र

bahr • بحر

छंद; लय

meter; rhythm

بحر; لَے

Arabic

क़फ़स उदास है यारों सबास कुछ तो कहो कहीं तो बहर-ए-ख़ुदा आज ज़िक्र-ए-यार चले — Faiz Ahmad Faiz
रदीफ़ो-क़ाफ़िया-ओ-बह'र का भी इल्म है लाज़िम फ़क़त दिल टूट जाने से कोई शाइ'र नहीं बनता — Avtar Singh Jasser
फूलों की दुकान गए हम और गुलाब को देखा देख के छोड़ दिया या'नी इन आँखों ने फिर आप के ख़्वाब को देखा देख के छोड़ दिया बह्र-ए-मीर-(22×9) — Chandan Sharma
आज एक दूजे को छोड़ जाना है हम ने आओ आख़िरी बारी शहर साथ में देखें Behr: 212 1222 212 1222 — Amanpreet singh
इतनी सर्दी है कि मैं बाँहों की हरारत माँगूँ रुत ये मौज़ूँ है कहाँ घर से निकलने के लिए — Zubair farooq
उस को देखा तभी ख़ुदा ने लफ़्ज़ जमाल ईजाद किया वो बोली तो बहरो ने भी सुन-सुन कर इरशाद किया — Aalam
बे-बहर जुमलों को ग़ज़ल कहते हो तुम हर्फ़-ए-ग़लत है ये तो मैं कहता रहा — Lalit Mohan Joshi
आजकल कुछ भी सुनाई क्यूँँ नहीं देता हमें हम ही बहरे हो गए या चुप लगा बैठा है वो — Atul K Rai
मैं बहर-हाल ख़राबी पे ही ख़ुश हूँ अपनी क्या करेगा तू भला मेरा भला रहने दे — Wajid Husain Sahil

कविता में, 'बह्र' उस लयबद्ध संरचना को संदर्भित करता है जो कविता को उसकी संगीतात्मक गुणवत्ता देती है। यह एक पद्य का दिल की धड़कन है, जो शब्दों के प्रवाह और गति को मार्गदर्शन करता है।

कवि अपने कार्य के भावनात्मक प्रभाव को बढ़ाने के लिए 'बह्र' का सावधानीपूर्वक चयन करते हैं। यह चुनी गई लय के आधार पर, तात्कालिकता, शांति, या उदासी की भावना को जागृत कर सकता है।

'बह्र' कविता की आत्मा का मौन वास्तुकार है, जो अदृश्य लय के धागों से इसके भावनात्मक परिदृश्य को आकार देता है।