itni sardi hai ki main baanhon ki hararat maanguun | इतनी सर्दी है कि मैं बाँहों की हरारत माँगूँ

  - Zubair farooq

इतनी सर्दी है कि मैं बाँहों की हरारत माँगूँ
रुत ये मौज़ूँ है कहाँ घर से निकलने के लिए

  - Zubair farooq

Sardi Shayari

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