ग़म से रिश्ता अब भुलाया जाएगा
इक नया रिश्ता कमाया जाएगा
किस क़दर फिर वो भुलाएगा हमें
जब हमें उस सेे मिटाया जाएगा
ज़ख़्म कैसे हो मुफ़ीद-ए-आम अब
चोट से दिल जब दुखाया जाएगा
क्यूँ ग़रज़ अब हम करें लोगों का तो
तीर जब हम पर चलाया जाएगा
हम अभी अनजान माना हैं यहाँ
बाद मरने के तो गाया जाएगा
ये ज़माने वाले कहते हैं हमें
रोज़ हमको आज़माया जाएगा
मौत से होगा हमारा जब मिलन
यार फूलों से सजाया जाएगा
यूँँ 'ललित' को दे रहे है दर्द सब
शाइरी में फिर बताया जाएगा
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