ek din main yaar ho banjar gaya | एक दिन मैं यार हो बंजर गया

  - Lalit Mohan Joshi

एक दिन मैं यार हो बंजर गया
इस जहाँ से यार जब मैं मर गया

साँस दिल से राब्ता सब तोड़कर
यार तन्हा तो ज़ियादा कर गया

आँख पर तो अश्क आऍंगे यहाँ
यार उन सेे जाने वो क्यूँ डर गया

और दो दिन शोक भी होगा मेरा
जब ख़ुदा के यार जो मैं घर गया

छोड़कर सब कुछ यहाँ मैं बस सुनो
याद को ज़िंदा यहाँ बस कर गया

संग अपने कुछ भले मैं काम लूॅं
राख ख़ुद बनके यहाँ तो मर गया

एक दिन मैं काम पर जाकर कहीं
फिर नहीं अब लौटकर जो घर गया

यार लिखकर ग़म यहाँ सबके सुनो
अब यहाँ ख़ुद को अमर भी कर गया

देखकर मैं भीड़ तेरे शहर की
हाथ की नस काट अब मैं मर गया

इस ज़माने से परेशाँ जब हुआ
तो 'ललित' ख़ुद क़त्ल अपना कर गया

  - Lalit Mohan Joshi

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