harf sab meri ghazal ke kahte kahte | हर्फ़ सब मेरी ग़ज़ल के कहते कहते

  - Lalit Mohan Joshi

हर्फ़ सब मेरी ग़ज़ल के कहते कहते
रो उठे मक़्ते पे जैसे कहते कहते

शायरी का इक हुनर भी आ गया है
शे'र यानी हो गया ये कहते कहते

हर्फ़ जागे रातभर इक शर्त पर अब
हारना तुमको नहीं ये कहते कहते

वो अमीरों में नए दाख़िल हुए कल
ये जताने ही लगे थे कहते कहते

साल बीता एक माँ से बिन मिले जब
था कहाँ तू रो पड़ी ये कहते कहते

एक तेरा दुख मुझे बस खा रहा है
रो पड़ी माँ फ़ोन पर ये कहते कहते

देख दुनिया नाम के नश्तर को यारो
छिप गया कोने 'ललित' ये कहते कहते

  - Lalit Mohan Joshi

More by Lalit Mohan Joshi

As you were reading Shayari by Lalit Mohan Joshi

Similar Writers

our suggestion based on Lalit Mohan Joshi

Similar Moods

As you were reading undefined Shayari