Meaning of

मक़्ते

makte • مقطعے

अंतिम शेर; निष्कर्ष

ending couplet; conclusion

آخری شعر; نتیجہ

Arabic

हाथों में उस के है बसी संजीवनी जैसे कहीं बहती नदी, कंगन को फिर हम ने दमकते देखा है — Divya 'Kumar Sahab'
हुआ है ज़िक्र मक्ते में कहीं पर नाम का तेरे दिखा है अक्स तारों में क़लम रातों में चलती है — Kanha Mohit
क्यूँ आ जाते हो सीधे मक़्ते पर पहले थोड़ा काम करो मतले पर — Saahir
मैं हूँ तुम हो तुम हो मैं हूँ दुनिया से क्या नाता है गीत ग़ज़ल के हर मक़्ते में नाम तुम्हारा आता है — Krishnavat Ritesh
ये तुझ सेे बात कर के जाना है मैं ने चमकते क्यूँ है तारे चाँद से मिल के — 100rav

कविता की दुनिया में, 'मक़्ता' ग़ज़ल का अंतिम शेर होता है, जहाँ कवि अक्सर अपना तख़ल्लुस प्रकट करते हैं। यह शेर पूरी कविता का सार होता है, जिसमें उसकी भावनात्मक और विषयगत गहराई समाहित होती है।

कवि 'मक़्ता' का उपयोग एक स्थायी छाप छोड़ने के लिए करते हैं, अक्सर इसमें व्यक्तिगत स्पर्श या गहरी अंतर्दृष्टि शामिल होती है। यह एक हस्ताक्षर के रूप में कार्य करता है, कवि की आवाज़ की अंतिम फुसफुसाहट।

'मक़्ता' कवि का विदाई है, एक नाजुक समापन जो अंतिम शब्दों से परे गूंजता है।