अब तो ख़्वाबों में ही उस सेे बात मेरी हो जाती हैकाग़ज़ और क़लम होते हैं रात मेरी हो जाती हैग़ज़लें लिखते-लिखते आँसू काग़ज़ पर गिरते हैं फिरमतले से ले कर मक्ते तक मात मेरी हो जाती है— Ravi 'VEER'