Meaning of

बुताँ

butaan • بتاں

मूर्तियाँ; प्रतिमाएँ

idols; statues

بت; مجسمے

Persian

मुनकिर-ए-इश्क़ के सीने से निकलता है धुआँ
जानिब-ए-कू-ए-बुतां मेरे क़दम उठते हैं

रोक लेती हैं वो आँखों का इशारा देकर
उन की महफ़िल से अगर जाने को हम उठते हैं

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धमका के बोसे लूँगा रुख़-ए-रश्क-ए-माह का
चंदा वसूल होता है साहब दबाव से

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इसी दुनिया में दिखा दें तुम्हें जन्नत की बहार
शैख़ जी तुम भी ज़रा कू-ए-बुताँ तक आओ

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'शाद' ग़ैर-मुमकिन है शिकवा-ए-बुताँ मुझ से
मैं ने जिस से उल्फ़त की उस को बा-वफ़ा पाया

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गरचे ख़ुदा-नुमा है कोई तो 'बशर' ही है
बज़्म-ए-बुताँ में एक ही फ़नकार है 'बशर'

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इन दीवारों की भी आँखें आ जाती हैं
मेरे पहलू से जब यादें आ जाती हैं

सँभलने लगता हूँ जब भी मैं यारों तब
दिन को धमका के ये रातें आ जाती हैं

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झुका रहता है हरदम सर हमारा
बुताँ तुम हो मदीने में हमारे

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ख़ुदा जाने के क्या आया गुमाँ में
चला आया हूँ मैं कू-ए-बुताँ में

चमन में फूल यूँँ नौहा कुनाँ है
कोई ले ले मुझे अपनी अमाँ में

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आप के चाहने वाले तो बिछड़ जाते हैं जल्द
प्रेमी क्या लज़्ज़त-ए-इश्क़-ए-बुताँ करिएगा आप

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यूँँ लग रहा है कू-ए-बुताँ में मुझे शजर
जैसे मैं आज ख़ुल्द-ए-बरी में पहुँच गया

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मुनकिर-ए-इश्क़ के सीने से निकलता है धुआँ
जानिब-ए-कू-ए-बुतां मेरे क़दम उठते हैं

रोक लेती हैं वो आँखों का इशारा देकर
उन की महफ़िल से अगर जाने को हम उठते हैं

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धमका के बोसे लूँगा रुख़-ए-रश्क-ए-माह का
चंदा वसूल होता है साहब दबाव से

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'बुताँ' सुंदरता और पूजा की छवि को उभारता है। कविता में, यह अक्सर प्रिय का प्रतीक होता है, जिसकी मोहकता एक दिव्य मूर्ति के समान होती है, जो हृदय की भक्ति और आराधना को पकड़ लेती है।

कवि 'बुताँ' का उपयोग अप्राप्य सुंदरता के विचार को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह आध्यात्मिक भक्ति और सांसारिक इच्छाओं के बीच के तनाव को भी दर्शा सकता है, जो काव्यात्मक परिदृश्य को समृद्ध करता है।

'बुताँ' आराधना और इच्छा के बीच के शाश्वत नृत्य को पकड़ता है, जो काव्यात्मक अन्वेषण का एक केंद्रीय विषय है।