Meaning of

बुलंदी

bulandi • بلندی

ऊँचाई; उन्नति; महत्ता

height; elevation; exaltation

بلندی; عروج; عظمت

Persian

अभी चाहिए और कितनी बुलंदी
कि सहमा है सूरज इमारत के पीछे

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आसमाँ इतनी बुलंदी पे जो इतराता है
भूल जाता है ज़मीं से ही नज़र आता है

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शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा है
जिस डाल पे बैठे हो वो टूट भी सकती है

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तुम उस को बुलंदी से गिराने में लगे हो
तुम उस को निगाहों से गिरा क्यूँँ नहीं देते

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घास की तरह पड़े हैं हम लोग
न बुलंदी है न गहराई है

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जब बुलंदी का गुमाँ था तो नहीं याद आई
अपनी परवाज़ से टूटे तो ज़मीं याद आई

वही आँखें कि जो ईमान-शिकन आँखें हैं
उन्हीं आँखों की हमें दावत-ए-दीं याद आई

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ये रिश्तों से बना है घर ये ईटों का मकाँ कुछ है
मुझे ये छत बताती है पिता का सायबाँ कुछ है

बुलंदी पर पहुँच माता पिता को छोड़ देते हैं
अरे पागल धरा जब तक तभी तक आसमाँ कुछ है

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तुम आसमाँ की बुलंदी से जल्द लौट आना
हमें ज़मीं के मसाइल पे बात करनी है

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शिखर नापा नहीं मैं ने कभी अपनी बुलंदी का
मेरी ताक़त का अंदाज़ा मेरे दुश्मन से कर लेना

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ख़ुदा तेरा मोहताज हूँ अपना मोहताज रखना
अता कर बुलंदी, खु़दाई की भी लाज रखना

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अभी चाहिए और कितनी बुलंदी
कि सहमा है सूरज इमारत के पीछे

6

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आसमाँ इतनी बुलंदी पे जो इतराता है
भूल जाता है ज़मीं से ही नज़र आता है

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‘बुलंदी’ महानता की आकांक्षा और ऊँचे आदर्शों की खोज को दर्शाता है। कविता में, यह अक्सर मानव आत्मा की उत्कृष्टता की खोज और साधारण से ऊपर उठने की इच्छा को व्यक्त करता है।

कवि ‘बुलंदी’ का उपयोग महत्वाकांक्षा और सपनों की निरंतर खोज के विषयों को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह विनम्रता के विषयों के साथ विपरीत होता है, आकांक्षा और संतोष के बीच के तनाव को उजागर करता है।

‘बुलंदी’ की चढ़ाई में, मानव क्षमता की ऊँचाइयों की खोज होती है।