Meaning of

बुलंदी

bulandi • بلندی

ऊँचाई; उन्नति; महत्ता

height; elevation; exaltation

بلندی; عروج; عظمت

Persian

आसमाँ इतनी बुलंदी पे जो इतराता है भूल जाता है ज़मीं से ही नज़र आता है — Waseem Barelvi
तुम उस को बुलंदी से गिराने में लगे हो तुम उस को निगाहों से गिरा क्यूँँ नहीं देते — Siraj Faisal Khan
शिखर नापा नहीं मैं ने कभी अपनी बुलंदी का मेरी ताक़त का अंदाज़ा मेरे दुश्मन से कर लेना — Rakesh Mahadiuree
ख़ुदा तेरा मोहताज हूँ अपना मोहताज रखना अता कर बुलंदी, खु़दाई की भी लाज रखना — Abuzar kamaal
शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा है जिस डाल पे बैठे हो वो टूट भी सकती है — Bashir Badr
घास की तरह पड़े हैं हम लोग न बुलंदी है न गहराई है — Farhat Ehsaas
तुम आसमाँ की बुलंदी से जल्द लौट आना हमें ज़मीं के मसाइल पे बात करनी है — Shayar Jamali
अभी चाहिए और कितनी बुलंदी कि सहमा है सूरज इमारत के पीछे — Kanha Mohit

‘बुलंदी’ महानता की आकांक्षा और ऊँचे आदर्शों की खोज को दर्शाता है। कविता में, यह अक्सर मानव आत्मा की उत्कृष्टता की खोज और साधारण से ऊपर उठने की इच्छा को व्यक्त करता है।

कवि ‘बुलंदी’ का उपयोग महत्वाकांक्षा और सपनों की निरंतर खोज के विषयों को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह विनम्रता के विषयों के साथ विपरीत होता है, आकांक्षा और संतोष के बीच के तनाव को उजागर करता है।

‘बुलंदी’ की चढ़ाई में, मानव क्षमता की ऊँचाइयों की खोज होती है।