Meaning of

बैत

bait • بیت

शेर; दोहा

verse; couplet

شعر; دوہا

Arabic

परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है — Shakeel Azmi
चाय पीते हैं कहीं बैठ के दोनों भाई जा चुकी है ना तो बस छोड़ चल आ जाने दे — Ali Zaryoun
फ़ासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा न था सामने बैठा था मेरे और वो मेरा न था — Adeem Hashmi
तेरा चुप रहना मेरे ज़ेहन में क्या बैठ गया इतनी आवाज़ें तुझे दीं कि गला बैठ गया — Tehzeeb Hafi
हम भी गाँव में शाम को बैठा करते थे हम को भी हालात ने बाहर भेजा है — Zahid Bashir

अपने मूल अर्थ में, 'बैत' कविता की एक इकाई है, जो एक शेर के रूप में होती है और एक बड़े रचना का हिस्सा होती है। यह एक संपूर्ण विचार या भावना को अपने संक्षिप्त ढांचे में समेटे हुए होती है, जो अक्सर एक गहरी छाप छोड़ती है।

कवि 'बैत' का उपयोग गहरी भावनाओं या दार्शनिक विचारों को समेटने के लिए करते हैं। यह ग़ज़लों और अन्य काव्य रूपों में एक निर्माण खंड के रूप में कार्य करता है, जो अक्सर अन्य शेरों के साथ विरोधाभास या पूरकता में होता है।

'बैत' अपने आप में एक ब्रह्मांड है, जो अपनी संक्षिप्तता में कविता का सार समेटे हुए है।