Meaning of

बैर

bair • بیر

दुश्मनी; शत्रुता

enmity; hostility

دشمنی; عداوت

Sanskrit

मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा — Allama Iqbal
उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया देखा इस बीमारी-ए-दिल ने आख़िर काम तमाम किया — Meer Taqi Meer
किसी से झूठी मुहब्बत किसी से सच्चा बैर मैं कर तो सकता हूँ ये सब मगर नहीं करूँँगा — Abhishek shukla
इक हसीं ख़्वाब कि आँखों से निकलता ही नहीं एक वहशत है कि ता'बीर हुई जाती है — Ambreen Haseeb Ambar
यूँँ न कर वस्ल के लम्हों को हवस से ता'बीर चंद पत्ते ही तो तोड़े हैं शजर से मैं ने — Khurram Afaq

‘बैर’ एक ऐसा शब्द है जो गहरी दुश्मनी का भार वहन करता है। कविता में, यह अक्सर मानवीय संबंधों के गहरे रंगों को दर्शाता है, जहाँ प्रेम और घृणा एक नाजुक संतुलन में सह-अस्तित्व रखते हैं।

कवि ‘बैर’ का उपयोग संघर्ष और सुलह के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह आत्म के भीतर या व्यक्तियों के बीच संघर्ष को दर्शा सकता है, जो मानवीय भावनाओं की जटिलता को उजागर करता है।

‘बैर’ मानवीय प्रकृति की द्वैतता को दर्शाता है, जहाँ प्रेम और दुश्मनी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।