
बिना तेरे अधूरे मेरे हर इक शे'र रह जाते
कि जैसे राम बिन शबरी के सारे बेर रह जाते
तुम्हारे वास्ते मैं ने यहाँ महफ़िल सजाई थी
भला होता अगर तुम और थोड़ी देर रह जाते
— Alankrat Srivastava
Other sher from the same pen
Shers of jashn shayari collection.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling