क़फ़स को तोड़ के जब भी असीर निकलेगाहमारे खोल के अंदर से मीर निकलेगाधुआँ है राख है और ढ़ेर है चिताओं कायहीं से नाचता गाता कबीर निकलेगा— Vishnu virat