Meaning of

मआ'नी

maani • معانی

अर्थ; व्याख्याएँ; भावार्थ

meanings; interpretations; senses

معانی; تفسیریں; مفاہیم

Arabic

वो एक दिन जो तुझे सोचने में गुज़रा था
तमाम उम्र उसी दिन की तर्जुमानी है

32

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बात ही कब किसी की मानी है
अपनी हठ पूरी कर के छोड़ोगी

ये कलाई ये जिस्म और ये कमर
तुम सुराही ज़रूर तोड़ोगी

162

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बैठे हैं चैन से कहीं जाना तो है नहीं
हम बे-घरों का कोई ठिकाना तो है नहीं

तुम भी हो बीते वक़्त के मानिंद हू-ब-हू
तुम ने भी याद आना है आना तो है नहीं

77

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फिर एक रोज़ मुक़द्दर से हार मानी गई
ज़बीन चूम के बोला गया "ख़ुदा हाफ़िज़"

58

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मैं उस से बात करने जा चुका था
मगर वो शख़्स आगे जा चुका था

पढ़ाई ख़त्म कर के जब मैं लौटा
कोई अफ़सर उसे ले जा चुका था

51

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बद-गुमानी को बढ़ा कर तुम ने ये क्या कर दिया
ख़ुद भी तन्हा हो गए मुझ को भी तन्हा कर दिया

45

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तेरे ही लिए आएँगे तेरे पास
किसी से बिछड़ कर नहीं आएँगे

बुरा मानिए तो बुरा मानिए
इजाज़त तो ले कर नहीं आएँगे

44

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ये जो दौलत कमानी पड़ रही है
बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ रही है

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कोई शिकवा न करे बहते हुए पानी से
कश्तियाँ डूबी हैं कुछ अपनी ही मनमानी से

35

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उस वक़्त पढ़ो जब मैं लफ़्ज़ों में नहीं होता
उस वक़्त मेरे मानी आसान निकलते हैं

34

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वो एक दिन जो तुझे सोचने में गुज़रा था
तमाम उम्र उसी दिन की तर्जुमानी है

32

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बात ही कब किसी की मानी है
अपनी हठ पूरी कर के छोड़ोगी

ये कलाई ये जिस्म और ये कमर
तुम सुराही ज़रूर तोड़ोगी

162

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'मआ'नी' शब्द अर्थों और व्याख्याओं के क्षेत्र में गहराई से उतरता है। कविता में, यह संभावनाओं की एक दुनिया खोलता है, जहाँ शब्द अपने शाब्दिक अर्थ से परे जाकर गहरे भावनाओं और अंतर्दृष्टियों को जगाते हैं।

कवि 'मआ'नी' का उपयोग भाषा और भावना की परतों का अन्वेषण करने के लिए करते हैं। यह छिपे हुए सत्य को उजागर करने और अव्यक्त को व्यक्त करने का एक साधन है।

भाषा की भूलभुलैया में, 'मआ'नी' एक मार्गदर्शक है, जो हमें समझ के हृदय तक ले जाता है।