Meaning of

मरीज़-ए-इश्क़

mareez-e-ishq • مریض عشق

प्रेम का रोगी; प्रेम में पीड़ित

lover afflicted by love; love's patient

محبت کا مریض; عشق میں مبتلا

Persian

मरीज़-ए-इश्क़ हूँ दीदार-ए-यार काफ़ी है मिलेगा दीद से जो भी क़रार काफ़ी है — Nityanand Vajpayee
किसी भी डॉक्टर से लो नसीहत या हकीमों से अगर मेरा मरीज़-ए-इश्क़ है तो मैं शिफ़ा दूँगा — Karal 'Maahi'
मरीज़-ए- इश्क़ से उस का हाल मत पूछा करो तुम तबस्सुम लब-कुशा लहजा, झूठ होगा ठीक ही हूँ — A R Sahil "Aleeg"
अभी तुम ने मेरी बदमाशियाँ देखी कहाँ है मरीज़-ए-इश्क़ की गुस्ताख़ियाँ देखी कहाँ है — Saarthi Baidyanath
ज़र से परे बस एक दुआ ढूँढ़ते हुए आया मरीज़-ए-इश्क़ दवा ढूँढ़ते हुए — Shekhar Mandal
न हम आबाद कहते हैं, न हम बर्बाद कहते हैं उसे जो कि मरीज़-ए-इश्क़ है, फ़रहाद कहते हैं — Sumit Panchal
मरीज़-ए-इश्क़ तेरा हूँ इलाज-ए-इश्क़ तुझ सेे हो पराई ओक से ले लूँ दवा प्यासा नहीं हूँ मैं — Krish Gour 'Jazbaat'

‘मरीज़-ए-इश्क़’ वाक्यांश प्रेम की तीव्र और संपूर्ण प्रकृति को दर्शाता है, इसे एक ऐसे रोग के रूप में प्रस्तुत करता है जो व्यक्ति के अस्तित्व को अपने कब्जे में ले लेता है। कविता में, यह गहरे जुनून और ऐसी गहन भावनाओं के साथ आने वाली असुरक्षा को दर्शाता है।

कवि 'मरीज़-ए-इश्क़' का उपयोग प्रेम के विरोधाभास को, जो आनंद और पीड़ा दोनों का स्रोत है, को खोजने के लिए करते हैं। इसे अक्सर एक लाइलाज स्थिति के रूप में चित्रित किया जाता है, जो इच्छा और पूर्ति के बीच के शाश्वत संघर्ष को उजागर करता है।

कविता के क्षेत्र में, 'मरीज़-ए-इश्क़' प्रेम की शक्ति का प्रमाण है, जो घाव भी कर सकती है और उपचार भी।