Meaning of

महज़

mahj • محض

केवल; मात्र; सिर्फ़

mere; only; just

صرف; محض; فقط

Arabic

यूँँ कहें नुमाइशों के दिन क़रीब आ गए महज़ फ़रवरी हो किस तरह महीना इश्क़ का — Neeraj Neer
रूप और रंग, ये वक़्त सब ले गया महज़ तस्वीर और आइना रह गया — Prit
महज़ इक ख़्वाब बनकर रह गई तुम हक़ीक़त में तुम्हें सब चाहते थे — Kush Pandey ' Saarang '
महज़ तस्वीर देख लगता है जैसे जाँ तुम क़रीब बैठी हो — ABhishek Parashar
जिस के संग सफ़र तय करने की आरज़ूू थी मुझे वो नाविक महज़ काग़ज़ की क़श्ती पर सवार था — Shivali Taneja

'महज़' का मूल अर्थ किसी चीज़ के केवल वही होने का है, जो वह है, बिना किसी अतिरिक्तता या अलंकरण के। कविता में, यह शब्द अक्सर सादगी या स्पष्टता की भावना को गहराई देता है, विषय के सार को बिना किसी विचलन के उजागर करता है।

'महज़' का उपयोग कवि किसी भावना या वस्तु की शुद्धता या एकता को उजागर करने के लिए करते हैं। यह अक्सर अधिक जटिल या परतदार अवधारणाओं के विपरीत होता है, जिससे मूल सत्य या भावना पर ध्यान केंद्रित होता है।

कविता में, 'महज़' हमें सादगी में सुंदरता देखने के लिए आमंत्रित करता है। यह हमें याद दिलाता है कि कभी-कभी, सार ही पर्याप्त होता है।