Meaning of

मिस्रा–ए–सानी

misra-e-saani • مصرع ثانی

शेर की दूसरी पंक्ति

second line of a couplet

شعر کی دوسری لائن

Persian

हम मुहब्बत की ग़ज़ल का हैं मुकम्मल मतला मिस्रा-ए-ऊला हूँ मैं मिस्रा-ए-सानी तुम हो — Shajar Abbas
मिसरा-ए-ऊला में हर बार तेरा ज़िक्र किया मिसरा-ए-सानी में बस ख़ुद को अधूरा पाया — Amit Nandan Dev

'मिसरा-ए-सानी' शेर की दूसरी पंक्ति है, जहाँ विचार या भावना अपनी पूर्ण अभिव्यक्ति तक पहुँचती है। यह समाधान है, पहली पंक्ति द्वारा प्रस्तुत प्रश्न का उत्तर। कविता में, यह उद्घाटन का क्षण है, जहाँ कवि की मंशा पूरी तरह से साकार होती है।

कवि 'मिसरा-ए-सानी' का उपयोग पंचलाइन या भावनात्मक चरमोत्कर्ष देने के लिए करते हैं। इसमें अक्सर वह मोड़ या गहरी अंतर्दृष्टि होती है जो एक स्थायी छाप छोड़ती है। दूसरी पंक्ति वह जगह है जहाँ शेर की सच्ची शक्ति प्रकट होती है।

मिसरा-ए-सानी कवि का अंतिम स्पर्श है, जो शेर की यात्रा को अनुग्रह और गहराई के साथ पूरा करता है।