Meaning of

मिस्रे

misre • مصرے

शेर; काव्य पंक्तियाँ

verses; poetic lines

مصرے; شعری سطریں

Arabic

ये जो हिजरत के मारे हुए हैं यहाँ अगले मिसरे पे रो के कहेंगे कि हाँ — Ali Zaryoun
देखो तो बात इस में जहाँ भर की है निहाँ वरना तो कुछ नहीं है दो मिसरे की बात है — Siddharth Saaz
यूँंँ हक़ जताते मैं ग़ज़ल हूँ वो तख़ल्लुस है कोई बहरों में करते क़ैद मिसरे रब्त में होते नहीं — Priya omar
अधूरे ज़ीस्त के मिसरे ग़ज़ल कोई अधूरी सी क़वाफ़ी से बदलते तुम मेरी फ़ितरत रदीफ़ों सी — Priya omar
मुकम्मल शे'र होता ही नहीं है एक मिसरे से मेरा होना ज़रूरी है तेरा होना ज़रूरी है — Saarthi Baidyanath
अब तो इक मिसरे को ले कर हफ़्तों बैठे रहते हैं पहले तेरी इक तस्वीर पे दो नज़्में हो जाती थीं — Siddharth Saaz
मेरे मिसरे मेरी बातें उलट-पुलट कर पढ़ते हैं आज तमाम इन नक़्कालों को नज़्र करूँँगा अपना शे'र — Amaan Pathan
जी लगाई है मैं ने ये गंदी आदत इन सभी को जो ये मेरे दोस्त सब मिसरों पे मिसरे मारते हैं — Aves Sayyad
नैना हैं दोहे के मिसरे सूरत है ग़ज़लों सी उस की — Aarush Sarkaar

मिस्रे कविता की व्यक्तिगत पंक्तियों को संदर्भित करता है, जिनमें से प्रत्येक का अपना भार और लय होता है। कविता में, यह अभिव्यक्ति की आधारशिला है, जहाँ प्रत्येक पंक्ति अर्थ और भावना के समग्र ताने-बाने में योगदान करती है।

कवि 'मिस्रे' का उपयोग अपने कार्य के जटिल पैटर्न को गढ़ने के लिए करते हैं। प्रत्येक पंक्ति कविता के ताने-बाने में एक धागा होती है, जो एक सुसंगत और गूंजने वाले संपूर्ण को बनाने के लिए एक साथ बुनती है।

मिस्रे कविता की धड़कन हैं, प्रत्येक धड़कन शेर के जीवन में जोड़ती है।