Meaning of

मुख्तलिफ

mukhtalif • مختلف

विभिन्न; विविध; अलग-अलग

different; diverse; various

مختلف; متنوع; گوناگوں

Arabic

कहते हैं उम्र-ए-रफ़्ता कभी लौटती नहीं जा मय-कदे से मेरी जवानी उठा के ला — Abdul Hamid Adam
उस को राँझा मत कहो, जो ना हुआ फ़क़ीर जो ना जोगन हो सकी, सो काहे की हीर! — Harman Dinesh
दिन रात मय-कदे में गुज़रती थी ज़िंदगी 'अख़्तर' वो बे-ख़ुदी के ज़माने किधर गए — Akhtar Shirani
वो और लोग हैं जिन को 'अज़ीज़ है दुनिया तिरे फ़क़ीर ने दुनिया लुटा के रक़्स किया — Dharmesh bashar
गुज़ार देते हैं रातें पहलू में उस के जुगनू को भी दर का फ़क़ीर बना रखा है — ALI ZUHRI
सुनते हैं इश्क़ नाम के गुज़रे हैं इक बुज़ुर्ग हम लोग भी फ़क़ीर इसी सिलसिले के हैं — Firaq Gorakhpuri
मिरी रौशनी तिरे ख़द्द-ओ-ख़ाल से मुख़्तलिफ़ तो नहीं मगर तू क़रीब आ तुझे देख लूँ तू वही है या कोई और है — Saleem Kausar
सिकंदर मिलेंगे बहुत इक जगह पर कभी शाम तुम मय-कदे में गुज़ारो — Shubham Rai 'shubh'
ख़ूब-सूरत और भी हैं इस जहाँ में लड़कियाँ तुम मगर हो जान-ए-जाँ सब लड़कियों से मुख़्तलिफ़ — Milan Gautam

'मुख्तलिफ' का मूल अर्थ भिन्नता और विविधता की उपस्थिति को दर्शाता है। कविता में यह शब्द विविधता की समृद्धि, भिन्नताओं की सुंदरता और विरोधाभासों की जटिलता को खोजने के लिए अपनाया जाता है।

कवि अक्सर 'मुख्तलिफ' का उपयोग विविधता की सुंदरता को उजागर करने के लिए करते हैं। यह एक विविध अनुभवों से भरी दुनिया की कल्पना कर सकता है। यह एकरूपता के विपरीत है, अद्वितीय और विशिष्ट का उत्सव मनाता है।

कविता में, 'मुख्तलिफ' जीवन के अनेक रूपों का उत्सव बन जाता है। यह हमें हर भिन्नता में सुंदरता को अपनाने के लिए आमंत्रित करता है।