Meaning of

मुजस्सम

mujassam • شیر و نغمہ

साकार; अवतरित

embodied; incarnate

مجسم; مجسمہ

Arabic

आप लोगों की दु'आओं का हुआ कुछ यूँँ असर आँधियों ने भी मुजस्सम नूर कर डाला मुझे — Nityanand Vajpayee
मुजस्सम जो पड़ा है कौन था वो जो कोई भी था मिट्टी का बना था — Meem Alif Shaz
अगर हो कोहर-ए-वासर मुजस्सम कौन दिखता है हों जब गर्दिश में गर तारे तो हमदम कौन दिखता है — Ajeetendra Aazi Tamaam

मुजस्सम शब्द किसी अमूर्त विचार के ठोस रूप लेने का भाव जगाता है। कविता में, यह अक्सर भावनाओं या आदर्शों के मूर्त रूप में प्रकट होने का प्रतीक होता है, जो अमूर्त और वास्तविक के बीच की खाई को पाटता है।

कवि 'मुजस्सम' का उपयोग प्रेम, दुःख या सौंदर्य के साकार होने को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह दिखाता है कि गहरी भावनाएँ कैसे दुनिया में रूप लेती हैं। यह अमूर्त शब्दों के विपरीत होता है, विचार से रूपांतरण को उजागर करता है।

मुजस्सम अदृश्य से दृश्य में परिवर्तन के सार को पकड़ता है, एक यात्रा जिसे कवि अक्सर खोजते हैं।