Meaning of

मुस्तकबिल

mustakbil • مستقبل

भविष्य; भाग्य

future; destiny

مستقبل; تقدیر

Arabic

यही है ख़्वाब मुस्तक़बिल बने तू ही हमारा अब
अकेला सिर्फ़ दिल मेरा सहारा हो नहीं सकता

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माज़ी इक लंबी सियाह परछाई है
मुस्तकबिल में दूर तलक तन्हाई है

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मेरा साथ अभी तू दे दे
मुस्तकबिल ये हाल से बोले

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ब-मंज़िल पर हूँ मगर ये मकाँ मंज़िल नहीं लगता
सफ़र को भी मिरा अब कोई मुस्तक़बिल नहीं लगता

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बिछड़ना ही था मुस्तकबिल हमारा
उसे इस बात पे होता रहा रँज

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अहदे माज़ी में थे ग़ालिब, दोस्तों देखो ज़रा
नाम अपना भी कहीं पर दर्ज मुस्तक़बिल में है

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ज़िंदगी में तो है ला-फ़ानी, फ़क़त तीन चीज़
तल्ख़ माज़ी, ख़ौफ़े-मुस्तक़बिल या कोई क़ुनूत

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अब रहम कोई खाएगा क्या मेरे हाल पर
जब तुम ने मुझ को छोड़ दिया मेरे हाल पर

मुसतक़बिल अच्छा गुज़रेगा अपना न जाने कब
माज़ी भी मुस्कुराने लगा मेरे हाल पर

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मस्त है तारीख़ अपने हाल में
इस को मुस्तक़बिल का अंदाज़ा नहीं

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बड़ा बेहाल हाल-ए-दिल
न माज़ी है न मुस्तक़बिल

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यही है ख़्वाब मुस्तक़बिल बने तू ही हमारा अब
अकेला सिर्फ़ दिल मेरा सहारा हो नहीं सकता

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माज़ी इक लंबी सियाह परछाई है
मुस्तकबिल में दूर तलक तन्हाई है

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'मुस्तकबिल' शब्द अज्ञात और आने वाले समय की भावना को जगाता है। मूल रूप में यह भविष्य की ओर इशारा करता है, एक ऐसा समय जो अभी अनुभव नहीं किया गया है लेकिन जिसकी प्रतीक्षा की जाती है। कविता में यह भावना और गहराई से उभरती है, जहाँ भविष्य की आशा, भय और भाग्य की भावनात्मक भूमि का अन्वेषण होता है।

कवि अक्सर 'मुस्तकबिल' का उपयोग आशा और अनिश्चितता के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह अभी तक अधूरे सपनों या अभी तक अप्राप्त भय के लिए एक कैनवास हो सकता है। यह शब्द वर्तमान के विपरीत होता है, जो यह दर्शाता है कि क्या है और क्या हो सकता है के बीच का तनाव।

कविता में 'मुस्तकबिल' एक क्षितिज है, जो हमेशा दूर लेकिन हमेशा उपस्थित रहता है। यह हमें चुने गए रास्तों और आकार दिए गए भाग्यों पर विचार करने के लिए आमंत्रित करता है।