Meaning of

मृत

mrit • مردہ

मृत; निर्जीव

dead; lifeless

مردہ; بے جان

Sanskrit

ज़िंदगी ज़िंदा-दिली का है नाम मुर्दा-दिल ख़ाक जिया करते हैं — Imam Bakhsh Nasikh
ख़ुद-कुशी करने में भी नाकाम रह जाते हैं हम कौन अमृत घोल देता है हमारे ज़हर में — Anjum Ludhianvi
वो बेटे मुर्दो में गिने जाए ख़ुदा माँ बाप अकेले जिन के जाते अस्पताल — Jagveer Singh
जो न खेली होली 'अमृत' के साथ में हाथों में दीवाली तक गुलाल रहेगा — Amritanshu Sharma
तुम मेरे वो लगते हो जो कोई नइँ हो गई मैं अमृता सी प्यार में — Neeraj Neer
अलावा शिव के विष कोई नहीं पीता सभी अमृत के प्यासे देव या दानव — "Dharam" Barot
किसी साहिर को मैं भी चाहती हूँ मेरे अंदर भी कोई अमृता है — Shruti chhaya

यह शब्द जीवन की अनुपस्थिति को व्यक्त करता है, एक स्थिरता जो अंतिम और गहन दोनों है। कविता में, यह अक्सर यात्रा के अंत या उथल-पुथल के बाद की शांति का प्रतीक होता है।

कवि इस शब्द का उपयोग मृत्यु और समय के अनिवार्य प्रवाह के विषयों को उजागर करने के लिए करते हैं। यह जीवन की क्षणभंगुर प्रकृति और स्वीकृति में मिलने वाली शांति पर विचार कर सकता है।

कविता में, 'मृत' जीवन के क्षणभंगुर क्षणों और स्वीकृति के बाद की शांति की याद दिलाता है।