Meaning of

मौज-ए

mauj-e • موج

लहर; तरंग

wave; surge

لہر; موج

Persian

ग़म-ए-फ़ुर्क़त का शिकवा करने वाली मेरी मौजूदगी में सो रही है — Jaun Elia
कौन सी दीवार है मौजूद इस रिश्ते में 'साज़' क्यूँँ नहीं रो सकते हम अपने पिता के सामने — Siddharth Saaz
लब-ए-दरिया पे देख आ कर तमाशा आज होली का भँवर काले के दफ़ बाजे है मौज ऐ यार पानी में — Shah Naseer
जहाँ देखो वहाँ मौजूद मेरा कृष्ण प्यारा है उसी का सब है जल्वा जो जहाँ में आश्कारा है — Bhartendu Harishchandra
ऐ मौज-ए-हवादिस तुझे मालूम नहीं क्या हम अहल-ए-मोहब्बत हैं फ़ना हो नहीं सकते — Asad Bhopali
ग़ुरूर-ए-लुत्फ़-ए-साक़ी नश्शा-ए-बे-बाकी-ए-मस्ताँ नम-ए-दामान-ए-इस्याँ है तरावत मौज-ए-कौसर की — Mirza Ghalib
कुछ इमोजी वॉलपेपर पर पड़े रह जाएँगे फ़ोन से जितना मिटा लो चाहे मेरी चैट को — Sandeep Thakur
बचा लिया मुझे तूफ़ाँ की मौज ने वर्ना किनारे वाले सफ़ीना मिरा डुबो देते — Majrooh Sultanpuri

मूल रूप से 'मौज' पानी की प्राकृतिक उठान और गिरावट को दर्शाता है, जो गति और तरलता के सार को पकड़ता है। कविता ने इस शब्द को भावनाओं के उतार-चढ़ाव, जीवन की लहराती यात्रा, और प्रकृति के लयबद्ध नृत्य का प्रतीक बनाने के लिए अपनाया है।

'मौज' का उपयोग कवि अक्सर प्रेम की उथल-पुथल भरी प्रकृति को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह जुनून की अप्रत्याशित लहरों का प्रतिनिधित्व कर सकता है। यह स्थिरता के विपरीत है, जीवन के गतिशील सार को उजागर करता है।

मौज जीवन की निरंतर गति का सार पकड़ता है, परिवर्तन में सुंदरता की याद दिलाता है।