Meaning of

मज़्हब

mazhab • مذہب

धर्म; आस्था; पंथ

religion; faith; creed

مذہب; ایمان; عقیدہ

Arabic

मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा — Allama Iqbal
तुम्हें ये किस ने कहा रब को नहीं मानता मैं ये और बात कि मज़हब को नहीं मानता मैं — Bhaskar Shukla
अब तो मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाए जिस में इंसान को इंसान बनाया जाए — Gopaldas Neeraj
मुझ से कहा जिब्रील-ए-जुनूँ ने ये भी वही-ए-इलाही है मज़हब तो बस मज़हब-ए-दिल है बाक़ी सब गुमराही है — Majrooh Sultanpuri
क़ौम-ओ-मज़हब क्या किसी का और क्या है रंग-ओ-नस्ल ऐसी बातें छोड़ कर बस इल्म-ओ-फ़न की बात हो — Sayan quraishi
मज़हबी बहस मैं ने की ही नहीं फ़ालतू अक़्ल मुझ में थी ही नहीं — Akbar Allahabadi
रंग और नस्ल ज़ात और मज़हब जो भी है आदमी से कमतर है इस हक़ीक़त को तुम भी मेरी तरह मान जाओ तो कोई बात बने — Sahir Ludhianvi
मज़हब से मेरे क्या तुझे मेरा दयार और मैं और यार और मिरा कारोबार और — Meer Taqi Meer
राम-ओ-रहीम के पूजक प्यार क्यूँ न जाने दो मज़हबों की चाहत को इश्क़ क्यूँ न माने — ATUL SINGH

मज़्हब विश्वास प्रणालियों का भार वहन करता है जो समाजों और व्यक्तियों को आकार देते हैं। कविता में, यह अक्सर आध्यात्मिक भक्ति और सांसारिक अस्तित्व के बीच तनाव का अन्वेषण करता है।

कवि 'मज़्हब' में गहराई से जाकर विश्वास की प्रकृति और उसके मानव जीवन पर प्रभाव पर प्रश्न उठाते हैं। यह संघर्ष का स्रोत या ज्ञान का मार्ग हो सकता है।

मज़्हब, अपनी मूल भावना में, हृदय की गहरी आस्थाओं की यात्रा है।