Meaning of

रग-ए-तन्हाई

rag-e-tanhaai • رگ تنہائی

अकेलेपन की नस; तन्हाई की डोर

vein of solitude; thread of loneliness

تنہائی کی رگ; اکیلے پن کا دھاگہ

Persian

मैं भटकता ही रहा दश्त-ए-शनासाई में कोई उतरा ही नहीं रूह की गहराई में क्या मिलाया है बता जाम-ए-पज़ीराई में ख़ूब नश्शा है तेरी हौसला-अफ़जाई में तेरी यादों की सुई, प्रेम का धागा मेरा काम आए हैं बहुत ज़ख़्मों की तुरपाई में डस रही है ये सियह-रात की नागिन मुझ को भर रही ज़हर-ए-ख़मोशी, रग-ए-तन्हाई में सुर्मा-ए-मक्र-ओ-फ़रेब आँखों में जब से है लगा तब से है ख़ूब इज़ाफ़ा हद-ए-बीनाई में फ़िक्र-ओ-फ़न, रंग-ए-तग़ज़्ज़ुल, न ग़ज़ल की ख़ुशबू बस लगा रहता हूँ मैं क़ाफ़िया-पैमाई में सीख पानी से हुनर काम 'अनीस' आएगा दौड़ कर ख़ुद ही चला आता है गहराई में — Anis shah anis

रग-ए-तन्हाई उस गहरे अकेलेपन की उपस्थिति को दर्शाता है जो किसी के अस्तित्व में व्याप्त होती है। कविता में, यह अक्सर अकेलेपन के साथ घनिष्ठ और कभी-कभी भूतिया संबंध का प्रतीक है।

कवि रग-ए-तन्हाई का उपयोग गहरे अलगाव की भावना और इसके द्वारा प्रदान की जा सकने वाली मिठास और कड़वाहट की खोज के लिए करते हैं। यह साथीपन के शोर-शराबे के विपरीत है।

रग-ए-तन्हाई अकेलेपन में पाई जाने वाली शांत शक्ति की कोमल याद दिलाता है।