Meaning of

रुख़सार-औ-लब

rukhsar-o-lab • رخسار و لب

गाल और होंठ

cheeks and lips

رخسار و لب

Persian

सो देख कर तेरे रुख़्सार-ओ-लब यक़ीं आया कि फूल खिलते हैं गुलज़ार के अलावा भी — Ahmad Faraz

'रुख़सार-औ-लब' गालों और होंठों की नाजुक आकर्षण को पकड़ता है, जो अक्सर सुंदरता और इच्छा का प्रतीक होता है। कविता में, यह मानव संबंध के अंतरंग और कोमल पहलुओं को उजागर करता है, जहां एक नज़र या मुस्कान गहरे भावनाओं को व्यक्त कर सकती है।

कवि अक्सर 'रुख़सार-औ-लब' का उपयोग प्रिय की कामुक सुंदरता को उजागर करने के लिए करते हैं। यह युवावस्था के आकर्षण और सुंदरता की क्षणभंगुर प्रकृति का प्रतीक हो सकता है। यह अमूर्त के विपरीत है, कविता को ठोस छवियों में आधार देता है।

'रुख़सार-औ-लब' के कोमल नृत्य में, कविता क्षणभंगुर सुंदरता और शाश्वत इच्छा का सार पाती है।