Meaning of

रू-ब-रू

roo-b-roo • رو برو

सामना; आमने-सामने

face to face; in person

سامنے; روبرو

Persian

लगा था तब से मैं ख़ुद की मरम्मत में
ये दिल टूटा था जब पहली मोहब्बत में

बता कब तक मिलेंगे ख़्वाब में दोनों
कभी तो रू-ब-रू आ तू हक़ीक़त में

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एक आईना रू-ब-रू है अभी
उस की ख़ुश्बू से गुफ़्तुगू है अभी

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वैसे तो उस का नाम नहीं हाफ़िज़े में अब
मुमकिन है रूबरू जो कभी हो, पुकार दूँ

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शिकायतें भी बहुत हैं हिकायतें भी बहुत
मज़ा तो जब है कि यारों के रू-ब-रू कहिए

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मैं हूँ वो आइना जिस
में के शख़्सियत तेरी
हुई जो रू-ब-रू तो टूट फूट जाएगी

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होने दो तसल्ली से अभी ये गुफ़्तगू
जाने कब हो ऐसे ज़िन्दगी फिर रू-ब-रू

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रु-ब-रु ऐसी पास बस्ती है
रोते चेहरे उदास बस्ती है

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तेरी दो आँखें पढ़ने के लिए जानाँ
मुझे आना पड़ेगा रू-ब-रू तेरे

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दिलासा दे रही हो ख़ुद को लेकिन
हक़ीक़त से तो तुम भी रूबरू हो

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वस्ल की आख़िरी वो घड़ी याद है
वो जहाँ रू-ब-रू थी गली याद है

जो ख़फ़ा हो के जाती रक़ीबों तलक
मुझ को वो सरफिरी मनचली याद है

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लगा था तब से मैं ख़ुद की मरम्मत में
ये दिल टूटा था जब पहली मोहब्बत में

बता कब तक मिलेंगे ख़्वाब में दोनों
कभी तो रू-ब-रू आ तू हक़ीक़त में

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एक आईना रू-ब-रू है अभी
उस की ख़ुश्बू से गुफ़्तुगू है अभी

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'रू-ब-रू' शब्द का भाव उस निकटता और तात्कालिकता को दर्शाता है जब कोई व्यक्ति किसी के सामने होता है। कविता में, यह अक्सर उन भावनाओं की नग्नता को दर्शाता है जब दो आत्माएँ बिना किसी अवरोध के एक-दूसरे का सामना करती हैं।

मुठभेड़ या रहस्योद्घाटन के क्षणों को दर्शाने के लिए उपयोग किया जाता है। अक्सर रोमांटिक या आत्मनिरीक्षणात्मक कविता में प्रयुक्त होता है। सीधे मुकाबलों में उभरने वाली असुरक्षा और सत्य को उजागर करता है।

'रू-ब-रू' उन असुरक्षित क्षणों का सार पकड़ता है, जहाँ सत्य और भावना नग्न खड़े होते हैं।