Meaning of

रोज़-ओ-शब

roz-o-shab • روز و شب

दिन और रात; समय

day and night; time

روز و شب; وقت

Persian

इक ख़्वाब देखता हूँ मैं आज़ाद रोज़ो-शब
महफूज़ हैं वतन की मेरे बेटियाँ तमाम

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हुआ जो इश्क़ तो वो रोज़ ओ शब को भूल गए
वो अपने इश्क़ ए नुमाइश में सब को भूल गए

कहाँ वो दुनिया में आए थे बंदगी के लिए
मिला सुकून जहाँ में तो रब को भूल गए

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सब्र मेरा फ़िक्र में है रोज़-ओ-शब ये सोचता है
दूध में दोनों अँगूठी ढूँढ़ते कैसे लगेंगे

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मैं देखूँ रोज़-ओ-शब बस तुम को जानाँ मसअला क्या है
तुम इतनी ख़ूब-सूरत हो तुम्हारे साथ रहना है

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वो जिस का हम ने रोज़-ओ-शब सज्दा किया
उस शख़्स ने ही तो हमें तन्हा किया

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रोज़-ओ-शब देखो गिर्या-ओ-ज़ारी
हर घड़ी करते हैं इसी ग़म में

क्यूँ उन्होंने हमीं को ठुकराया
जाने किस शय की थी कमी हम में

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रोज़-ओ-शब के हैं मशग़ले 'हैदर'
सुब्ह था
में कि शाम अपने को

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रोज़-ओ-शब सुब्ह-ओ-शाम लेता है
हर घड़ी मेरा नाम लेता है

ख़ुद को मुश्किल में मुब्तिला कर के
मुझ से वो इंतिक़ाम लेता है

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होगा दुख कल उसे मंज़र के बदल जाने से
आज जो ख़ुश है दिसंबर के बदल जाने से

रोज़-ओ-शब रोते हैं हम कल भी हमें रोना है
हम को क्या फ़र्क कैलेंडर के बदल जाने से

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हयात ए मुख़्तसर तेरे
ये रोज़ ओ शब कटेंगे कब

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इक ख़्वाब देखता हूँ मैं आज़ाद रोज़ो-शब
महफूज़ हैं वतन की मेरे बेटियाँ तमाम

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हुआ जो इश्क़ तो वो रोज़ ओ शब को भूल गए
वो अपने इश्क़ ए नुमाइश में सब को भूल गए

कहाँ वो दुनिया में आए थे बंदगी के लिए
मिला सुकून जहाँ में तो रब को भूल गए

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'रोज़-ओ-शब' वाक्यांश समय के निरंतर प्रवाह को पकड़ता है। यह अस्तित्व की चक्रीय प्रकृति को दर्शाता है, जहाँ दिन रात के बाद एक अनंत नृत्य में आता है।

कवि 'रोज़-ओ-शब' का उपयोग समय और इसके जीवन पर प्रभाव के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह परिवर्तन की अनिवार्यता और जीवन की यात्रा की निरंतरता का प्रतीक हो सकता है।

कविता में, 'रोज़-ओ-शब' समय के शाश्वत प्रवाह की याद दिलाता है।