Meaning of

रोज़-ओ-शब

roz-o-shab • روز و شب

दिन और रात; समय

day and night; time

روز و شب; وقت

Persian

मैं देखूँ रोज़-ओ-शब बस तुम को जानाँ मसअला क्या है तुम इतनी ख़ूब-सूरत हो तुम्हारे साथ रहना है — Shaikh Sohail
हयात ए मुख़्तसर तेरे ये रोज़ ओ शब कटेंगे कब — Sumit Panchal
सब्र मेरा फ़िक्र में है रोज़-ओ-शब ये सोचता है दूध में दोनों अँगूठी ढूँढ़ते कैसे लगेंगे — Raj
रोज़-ओ-शब के हैं मशग़ले 'हैदर' सुब्ह था में कि शाम अपने को — Umrez Ali Haider
इक ख़्वाब देखता हूँ मैं आज़ाद रोज़ो-शब महफूज़ हैं वतन की मेरे बेटियाँ तमाम — Moin Ahmed "Aazad"

'रोज़-ओ-शब' वाक्यांश समय के निरंतर प्रवाह को पकड़ता है। यह अस्तित्व की चक्रीय प्रकृति को दर्शाता है, जहाँ दिन रात के बाद एक अनंत नृत्य में आता है।

कवि 'रोज़-ओ-शब' का उपयोग समय और इसके जीवन पर प्रभाव के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह परिवर्तन की अनिवार्यता और जीवन की यात्रा की निरंतरता का प्रतीक हो सकता है।

कविता में, 'रोज़-ओ-शब' समय के शाश्वत प्रवाह की याद दिलाता है।