Meaning of

वरक़

varq • ورق

पत्ता; पृष्ठ; कागज़

leaf; page; sheet

پتہ; صفحہ; کاغذ

Arabic

नाम लिख लिख के तिरा फूल बनाने वाला आज फिर शबनमीं आँखों से वरक़ धोता है — Ghulam Mohammad Qasir
हर साल की आख़िरी शामों में दो चार वरक़ उड़ जाते हैं अब और न बिखरे रिश्तों की बोसीदा किताब तो अच्छा हो — Ghulam Mohammad Qasir
किताबों के वरक़ छाने रिसालों में नहीं देखा मोहब्बत करने वालों को उजालों में नहीं देखा — Muneer shehryaar
झपके पलक, बदले वरक कैलेंडरों के तब यहाँ लेकिन हक़ीक़त ज़ीस्त की, तारीख़ में गुम है किसी — Zain Aalamgir
उतारा दिल के वरक़ पर तो कितना पछताया वो इंतिसाब जो पहले बस इक किताब पे था — Aanis Moin
नीले लाल निशाँ हैं सारे वरक़ों पर रात किताबों से पागल ने प्यार किया — Shiva awasthi
वरक़ पर ज़िंदगी का मैं मिरे मंज़र बनाऊँगी परिंदा इक बनाऊँगी पर वो बे-पर बनाऊँगी — Yasmin Khan

'वरक़' का मूल अर्थ एक पतला, नाज़ुक पृष्ठ है, अक्सर कागज़ या सोने का। कविता में, यह जीवन की नाज़ुकता और क्षणभंगुरता को दर्शाता है, जैसे एक पत्ता जो पलट सकता है या हवा में उड़ सकता है।

कवि अक्सर 'वरक़' का उपयोग क्षणों की क्षणभंगुरता को दर्शाने के लिए करते हैं। यह जीवन की किताब में एक पृष्ठ का प्रतिनिधित्व कर सकता है, जिसे भाग्य की हवाएँ पलट देती हैं। पत्ते या पृष्ठ की छवि नाज़ुकता और समय के बीतने का संकेत देती है।

कवि के हाथों में, 'वरक़' अस्तित्व की क्षणभंगुर सुंदरता के लिए एक कैनवास बन जाता है।