Meaning of

शनासा

shanaasa • شناسا

परिचित; जानकार

acquainted; familiar

واقف; شناسا

Persian

मैं भटकता ही रहा दश्त-ए-शनासाई में कोई उतरा ही नहीं रूह की गहराई में क्या मिलाया है बता जाम-ए-पज़ीराई में ख़ूब नश्शा है तेरी हौसला-अफ़जाई में तेरी यादों की सुई, प्रेम का धागा मेरा काम आए हैं बहुत ज़ख़्मों की तुरपाई में डस रही है ये सियह-रात की नागिन मुझ को भर रही ज़हर-ए-ख़मोशी, रग-ए-तन्हाई में सुर्मा-ए-मक्र-ओ-फ़रेब आँखों में जब से है लगा तब से है ख़ूब इज़ाफ़ा हद-ए-बीनाई में फ़िक्र-ओ-फ़न, रंग-ए-तग़ज़्ज़ुल, न ग़ज़ल की ख़ुशबू बस लगा रहता हूँ मैं क़ाफ़िया-पैमाई में सीख पानी से हुनर काम 'अनीस' आएगा दौड़ कर ख़ुद ही चला आता है गहराई में — Anis shah anis
औरों को अपने ग़म से शनासा न किया कर इस क़दर ज़िन्दगी का तमाशा न किया कर — Maviya abdul kalam khan
चराग़ों मुस्कुराने से नहीं डरना हवा से हो गई है अब शनासाई — Meem Alif Shaz
कू-ब-कू फैल गई बात शनासाई की उस ने ख़ुश्बू की तरह मेरी पज़ीराई की — Parveen Shakir
उस की दौलत से शनासाई है देर से बात समझ आई है — Rahul
यहाँ मेरा कोई शनासा न हो मोहब्बत हो लेकिन तमाशा न हो — Vaseem 'Haidar'
मिरी आबरू का तमाशा किया है किसी ने सरे आम मुझ को शनासा किया है किसी ने — Parvez Shaikh
जो पहलू में है तन्हाई है मेरे दोस्त यही अपनी शनासाई है मेरे दोस्त — Aditya Maurya

'शनासा' शब्द परिचय और पहचान की भावना को जगाता है। कविता में, यह अक्सर ज्ञात चेहरों या स्थानों में मिलने वाली आराम और गर्मजोशी को दर्शाता है। इसमें साझा इतिहास और पारस्परिक समझ का भार होता है।

'शनासा' का उपयोग कवि अक्सर नॉस्टेल्जिया या अपनत्व की भावना को जगाने के लिए करते हैं। यह अलगाव या अकेलेपन की भावनाओं के विपरीत हो सकता है। अक्सर, यह साझा क्षणों की सुंदरता और परिचित संबंधों में मिलने वाले सांत्वना को उजागर करता है।

अपने सार में, 'शनासा' हमें जोड़ने वाले संबंधों की कोमल याद दिलाता है। यह हृदय की जुड़ाव की लालसा को व्यक्त करता है।