Meaning of

शब-ए-फ़िराक़

shab-e-firaq • شب فراق

वियोग की रात; तड़प की रात

night of separation; night of longing

جدائی کی رات; تڑپ کی رات

Persian

शब-ए-फ़िराक़ गुज़र ही गई किसी तरह
ज़रा सी देर में सूरज निकलने वाला है

तेरे अलावा कहूँ किस से हाल-ए-दिल अपना
तेरे अलावा मेरी कौन सुनने वाला है

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गरेबाँ चाक, धुआँ, जाम, हाथ में सिगरेट
शब-ए-फ़िराक़, अजब हाल में पड़ा हुआ हूँ

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वो आ रहे हैं, वो आते हैं, आ रहे होंगे
शब-ए-फ़िराक़ ये कह कर गुज़ार दी हम ने

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मैं तो शब-ए-फ़िराक़ था तुम एक उम्र थी
फिर भी ज़ियादा तुम से गुज़ारा गया मुझे

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शब-ए-फ़िराक़ में अश'आर आशकार हुए
मुझे नहीं है सनम तुझ सेे अब गिला कोई

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उसे तो दौलत-ए-दुनिया भी कम भी पाने को
मिरी तो ज़ात का मीज़ान भी ज़ियादा नहीं

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दावा बहुत बड़ा है रियाज़ी में आप को
तूल-ए-शब-ए-फ़िराक़ को तो नाप दीजिए

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तेरे हसीन तसव्वुर को सामने ला कर
शब-ए-फ़िराक़ को बख़्शी है चाँदनी मैं ने

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शब-ए-फ़िराक़ पूरी रात सोना चाहिए हमें
मगर ये क्या सितम तिरे ख़याल बो रहे हैं हम

शब-ए-विसाल पूरी रात जगना चाहिए हमें
मगर ये क्या सितम सुकूँ की नींद सो रहे हैं हम

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ज़िक्र-ए-शब-ए-फ़िराक़ पे कहता था क्या हुआ
कल रात उस के साथ भी ये हादसा हुआ

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शब-ए-फ़िराक़ गुज़र ही गई किसी तरह
ज़रा सी देर में सूरज निकलने वाला है

तेरे अलावा कहूँ किस से हाल-ए-दिल अपना
तेरे अलावा मेरी कौन सुनने वाला है

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गरेबाँ चाक, धुआँ, जाम, हाथ में सिगरेट
शब-ए-फ़िराक़, अजब हाल में पड़ा हुआ हूँ

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यह शब्द उस गहरी, भयानक खामोशी को दर्शाता है जो प्रिय से दूर बिताई गई रात में होती है। कविता में, यह तड़प और समय के अंतहीन बीतने की भावना को पकड़ता है।

कवि अक्सर इसका उपयोग वियोग के दर्द को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह एक प्रेमी की भावनात्मक उथल-पुथल और शांत पीड़ा का प्रतीक है। यह मिलन की खुशी के विपरीत है।

शब-ए-फ़िराक़ की खामोशी में, दिल अपनी आवाज़ पाता है, प्रेम की मौन पुकारों को गूंजता हुआ।