शब-ए-फ़िराक़ गुज़र ही गई किसी तरहज़रा सी देर में सूरज निकलने वाला हैतेरे अलावा कहूँ किस से हाल-ए-दिल अपनातेरे अलावा मेरी कौन सुनने वाला है— Saif Dehlvi