Meaning of

शाख

shaakh • شاخ

शाखा; अंग

branch; limb

شاخ; عضو

Persian

शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे — Rahat Indori
बर्बाद गुलिस्ताँ करने को बस एक ही उल्लू काफ़ी था हर शाख़ पे उल्लू बैठा है अंजाम-ए-गुलिस्ताँ क्या होगा — Shauq Bahraichi
शाख़ें रहीं तो फूल भी पत्ते भी आएँगे ये दिन अगर बुरे हैं तो अच्छे भी आएँगे — Manzoor Hashmi
किसी ने मुझ से कह दिया था ज़िंदगी पे ग़ौर कर मैं शाख़ पर खिला हुआ गुलाब देखता रहा — Afzaal Firdaus
भरी बहार में इक शाख़ पर खिला है गुलाब कि जैसे तू ने हथेली पे गाल रक्खा है — Ahmad Faraz
परिंद शाख़ पे तन्हा उदास बैठा है उड़ान भूल गया मुद्दतों की बंदिश में — Khaleel Tanveer
वो शाख़ है न फूल, अगर तितलियाँ न हों वो घर भी कोई घर है जहाँ बच्चियाँ न हों — Bashir Badr
शाख़-दर-शाख़ होती है ज़ख़्मी जब परिंदा शिकार होता है — Indira Varma
तू परिंदा है किसी शाख़ को घर कर लेगा जो तेरे हिज्र का मारा है किधर जाएगा — Shadab Javed

'शाख' शब्द विकास और संबंध की छवियों को उकसाता है, एक बड़े संपूर्ण का हिस्सा। कविता में, यह भौतिक और रूपक दोनों विस्तारों का प्रतीक है, इच्छाओं, सपनों और संबंधों की पहुँच का प्रतिनिधित्व करता है।

कवि 'शाख' का उपयोग विकास, विभाजन और संबंध के विषयों का पता लगाने के लिए करते हैं। यह जीवन के शाखाओं वाले रास्तों या संबंधों की नाजुकता का प्रतीक हो सकता है। यह शब्द प्रकृति और मानव अनुभव के चिंतन को आमंत्रित करता है।

कविता में, 'शाख' जीवन की परस्परता और इसके खुलने की सुंदरता की याद दिलाती है।