Meaning of

शाम–ओ–सहर

shaam–o–sehr • شام و سحر

शाम और सुबह; संध्या और प्रातः

evening and morning; dusk and dawn

شام اور صبح; غروب اور طلوع

Persian

अजब अंदाज़ के शाम-ओ-सहर हैं कोई तस्वीर हो जैसे अधूरी — Asad Bhopali
हर्फ़-ए-दुआ में मेरे वो शाम-ओ-सहर रहता तो है पर ऐ ख़ुदा वो मेरा हो कर भी मिरा होता नहीं — Harsh Kumar Bhatnagar
बे-रंग ये ज़िंदगी रंग से भर के ख़ुशहाल शाम-ओ-सहर कर दिए आप — Divyanshu Tiwari SAHIL
आप जैसा आप को ही हो मुबारक अब मनाना जश्न ही शाम-ओ-सहर तक — Manohar Shimpi
हमीं देते हैं पत्थर को कोई चेहरा हमीं हैं पूजते शाम-ओ-सहर उस को — Irshad Siddique "Shibu"
भटकता नवी यूँँ ही बस हर पहर है इस शहर से एक शाम-ओ-सहर — Naviii dar b dar

यह वाक्यांश समय के शाश्वत चक्र को दर्शाता है, शाम की शांति और एक नए सवेरे के वादे के बीच के संक्रमण को पकड़ता है। कविता में, यह अक्सर समय के प्रवाह और जीवन के क्षणों की द्वैतता का प्रतीक होता है।

कवि इस वाक्यांश का उपयोग परिवर्तन और निरंतरता के विषयों को खोजने के लिए करते हैं। यह संक्रमण की सुंदरता या समय के प्रवाह की अनिवार्यता को दर्शा सकता है।

शाम-ओ-सहर जीवन के क्षणभंगुर पलों के नाजुक संतुलन को पकड़ता है।