ज़िन्दगी अपने लिए ख़ुद मौत बोती जाएगीशाम होते ही घनेरी रात होती जाएगीएक दिन मेरी चिता तैयार कर लेंगे सभीऔर फिर शाम-ओ-सहर बरसात होती जाएगी— nakul kumar