Meaning of

शाम-ए-विसाल

shaam-e-visaal • جلد

मिलन की शाम; साथ का समय

evening of union; time of togetherness

ملاقات کی شام; ساتھ کا وقت

Persian

कहानी ज़िन्दगी की जल्द ही हो ख़त्म तो अच्छा
बहुत लंबी हो कोई दास्तां तो बोझ लगती है

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सूख जाता जल्द है फिर भी निशानी के लिए
फूल इक छुप के किताबों में छिपाना इश्क़ है

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मैं बहुत जल्द लौट आऊँगा
तुम मिरा इंतिज़ार मत करना

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ईद के रोज़ यही अपनी दुआ है रब से
मुल्क में अमन का, उलफ़त का बसेरा हो जाए

हर परेशानी से हर शख़्स को मिल जाए नजात
इस सियह रात का बस जल्द सवेरा हो जाए

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है दुआ जल्दी जन्नत अता हो तुझे
तू मेरे इश्क़ का इश्क़ है ऐ रक़ीब

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तुम आसमाँ की बुलंदी से जल्द लौट आना
हमें ज़मीं के मसाइल पे बात करनी है

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जल्द-बाज़ी न करना चमकने में दोस्त
रात में कोई सूरज निकलता नहीं

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उदासी देर तक रहती है मेरे पास
ख़ुशी को जल्दबाज़ी रहती है जाने की

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हैरान भी बहुत हैं परेशान भी बहुत
यूँँ लग रहा है जैसे हैं अहल-ए-ग़दीर हम

ये राज़ खुलने वाला है दुनिया पे जल्द ही
साकित है वक़्त और हैं हरकत-पज़ीर हम

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पते पर जल्द पहुँचे या कि कुछ ताख़ीर से पहुँचे
है कितनी अहमियत ख़त की ये नामाबर नहीं समझा

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कहानी ज़िन्दगी की जल्द ही हो ख़त्म तो अच्छा
बहुत लंबी हो कोई दास्तां तो बोझ लगती है

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सूख जाता जल्द है फिर भी निशानी के लिए
फूल इक छुप के किताबों में छिपाना इश्क़ है

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यह वाक्यांश मिलन के शांत और कोमल क्षणों को दर्शाता है, अक्सर सांझ की कोमल छाया में। कविता में, यह प्रतीक्षा के अंत और इच्छाओं की मधुर पूर्ति का प्रतीक है।

कवि इस वाक्यांश का उपयोग प्रेमियों के लंबे वियोग के बाद अंततः मिलने के दृश्यों को चित्रित करने के लिए करते हैं। यह 'शाम-ए-फ़िराक़' (वियोग की शाम) के अकेलेपन के विपरीत है।

सांझ की कोमल छाया में, 'शाम-ए-विसाल' साथ होने का वादा फुसफुसाती है।