हैरान भी बहुत हैं परेशान भी बहुतयूँ लग रहा है जैसे हैं अहल-ए-ग़दीर हमये राज़ खुलने वाला है दुनिया पे जल्द हीसाकित है वक़्त और हैं हरकत-पज़ीर हम— Abdulla Asif