Meaning of

शीरीं

sheerin • شیریں

मधुर; सुखद

sweet; pleasant

شیریں; خوشگوار

Persian

प्याला ए अंगबीन क्यूँ हो तुम
इस क़दर दिल नशीन क्यूँ हो तुम

तुम को देखूं, तो होश खो बैठूँ
यार इतने हसीन क्यूँ हो तुम

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बोसा लिया जो उस लब-ए-शीरीं का मर गए
दी जान हम ने चश्मा-ए-आब-ए-हयात पर

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बोसा तो उस लब-ए-शीरीं से कहाँ मिलता है
गालियाँ भी मिलीं हम को तो मिलीं थोड़ी सी

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कुछ तो मिल जाए लब-ए-शीरीं से
ज़हर खाने की इजाज़त ही सही

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यक़ीं मोहकम अमल पैहम मोहब्बत फ़ातेह-ए-आलम
जिहाद-ए-ज़िंदगानी में हैं ये मर्दों की शमशीरें

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सभी इन'आम नित पाते हैं ऐ शीरीं-दहन तुझ से
कभू तू एक बोसे से हमारा मुँह भी मीठा कर

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अच्छी खासी दोस्ती थी यार हम दोनों के बीच
एक दिन फिर उस ने इज़हारे मुहब्बत कर दिया

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ग़ुलामी में न काम आती हैं शमशीरें न तदबीरें
जो हो ज़ौक़-ए-यक़ीं पैदा तो कट जाती हैं ज़ंजीरें

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हो गया ख़ामोश मैं भी देख लो आ कर सभी
मर गया अल्फ़ाज़ को शीरीं बनाने का हुनर

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लब को जब भी खोले है वो आ कर तितली बैठे है
कितना शीरीं कितना मीठा लहजा होगा साजन का

अपने मीठे हाथों से हर दिन वो पानी देती है
सोचो कितना मीठा होगा जामुन उस की आँगन का

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प्याला ए अंगबीन क्यूँ हो तुम
इस क़दर दिल नशीन क्यूँ हो तुम

तुम को देखूं, तो होश खो बैठूँ
यार इतने हसीन क्यूँ हो तुम

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बोसा लिया जो उस लब-ए-शीरीं का मर गए
दी जान हम ने चश्मा-ए-आब-ए-हयात पर

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'शीरीं' शब्द एक ऐसी मिठास को वहन करता है जो शाब्दिक अर्थ से परे है। यह एक कोमल शब्द या एक नाजुक पल की मोहकता को समेटे हुए है। कविता में, यह सुंदरता और आकर्षण का सार बन जाता है, एक आनंद की फुसफुसाहट।

कवि 'शीरीं' का उपयोग प्रेम और स्नेह की मिठास को जगाने के लिए करते हैं। यह अक्सर कड़वाहट के विपरीत होता है, जीवन के कोमल और सुखद पहलुओं को उजागर करता है।

कविता में, 'शीरीं' शब्दों का कोमल स्पर्श है जो एक स्थायी मिठास छोड़ता है। यह हमें सरलता में सुंदरता की याद दिलाता है।