Meaning of

शूल

shool • شول

कांटा; दर्द; बाधा

thorn; pain; obstacle

کانٹا; درد; رکاوٹ

Sanskrit

वही बातें उन्हें लगने लगी हैं शूल के जैसी
वही बातें, जो उन को इब्तिदा में फूल लगती थीं

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बो अगर तू भी शूल बोता है
इश्क़ में सब क़ुबूल होता है

मेरे फ़न के मिजाज़ पे मत जा
नाचते वक़्त मोर रोता है

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बदन पे ओढ़ लिए शूल, पैरहन के लिए
शहीद कितने ही गुल हो गए चमन के लिए

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दर्द मुहब्बत काँटे फूल
तेरी दी हर चीज़ क़ुबूल

तुझ को इक दिन खोना है
चुभता रहता है ये शूल

तेरी याद के साए में
रहता हूँ हर पल मशग़ूल

काश तुम्हें मैं पा सकता
काश दुआ होती ये क़ुबूल

चाहूँ इस दुनिया से मैं
प्यार हमारा हो मक़बूल

तुझ में बस खोना चाहूँ
दुनिया दारी सब कुछ भूल

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स्वयं की खोज में जिस ने स्वयं का मूल जाना है
नुकीले शूल को उस ने यहाँ पर फूल जाना है

सभी नदियों की चाहत है समुंदर जीत लेना पर
समुंदर से मिलन पर तो स्वयं को भूल जाना है

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कब अदालत किसे बरी कर दे
फ़ैसला अब अटल नहीं होता

शूल बोते हैं पाँव के नीचे
सच पे चलना सरल नहीं होता

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वही बातें उन्हें लगने लगी हैं शूल के जैसी
वही बातें, जो उन को इब्तिदा में फूल लगती थीं

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बो अगर तू भी शूल बोता है
इश्क़ में सब क़ुबूल होता है

मेरे फ़न के मिजाज़ पे मत जा
नाचते वक़्त मोर रोता है

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अपने मूल अर्थ में, 'शूल' कांटे की नुकीली और चुभने वाली प्रकृति को दर्शाता है। कविता ने इस शब्द को जीवन के आंतरिक दर्द और बाधाओं का प्रतीक बना लिया है, जो अक्सर अनदेखे होते हैं लेकिन गहराई से महसूस किए जाते हैं।

कवि अक्सर 'शूल' का उपयोग दिल के छिपे हुए दर्द को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह प्रेम में बाधाओं या अस्तित्व की चुभती सच्चाइयों का प्रतिनिधित्व कर सकता है। यह शब्द कोमल छवियों के विपरीत है, वास्तविकता की कठोरता को उजागर करता है।

कविता के क्षेत्र में, 'शूल' हमारे आंतरिक संसार को आकार देने वाले अनदेखे संघर्षों का प्रमाण है।