
दर्द मुहब्बत काँटे फूल
तेरी दी हर चीज़ क़ुबूल
तुझ को इक दिन खोना है
चुभता रहता है ये शूल
तेरी याद के साए में
रहता हूँ हर पल मशग़ूल
काश तुम्हें मैं पा सकता
काश दुआ होती ये क़ुबूल
चाहूँ इस दुनिया से मैं
प्यार हमारा हो मक़बूल
तुझ में बस खोना चाहूँ
दुनिया दारी सब कुछ भूल
— Ambar















