स्वयं की खोज में जिसने स्वयं का मूल जाना है
नुकीले शूल को उसने यहाँ पर फूल जाना है
सभी नदियों की चाहत है समुंदर जीत लेना पर
समुंदर से मिलन पर तो स्वयं को भूल जाना है
As you were reading Shayari by Kavi Naman bharat
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