Meaning of

शोहरतें

shohraten • شہرتیں

प्रसिद्धि; यश; कीर्ति

fame; renown; glory

شہرت; ناموری; عزت

Arabic

चाहतें कुछ नहीं शोहरतें कुछ नहीं
मांँ नहीं है अगर दौलतें कुछ नहीं

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सुब्ह-ए-मग़रूर को वो शाम भी कर देता है
शोहरतें छीन के गुमनाम भी कर देता है

वक़्त से आँख मिलाने की हिमाकत न करो
वक़्त इंसान को नीलाम भी कर देता है

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दौलतें हों शोहरतें हों क़ामयाबी चार-सू
आदमी दर आदमी अब सौ तरह की प्यास हैं

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इस लिए तुम को मिलती नहीं शोहरतें
तुम बहुत अच्छे शाइ'र नहीं हों 'रचित'

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मैं कमाऊँ शोहरतें किस के लिए सागर
हाँ जताने को कोई होता तो होता कुछ

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ये तुम पर रहा कुछ भी अंजाम कर दो
मुझे शोहरतें दो या बदनाम कर दो

दिखा दो मेरे ज़ख़्म सारे जहाँ को
मेरे राज़ सारे सरे-आम कर दो

सरे बज़्म पहलू से लग कर मेरे तुम
इरादे रक़ीबों के नाकाम कर दो

मुझे ले ही आए हो बाज़ार में तो
मेरी हसरतें सारी नीलाम कर दो

मेरी उँगलियाँ अपने होंटों से छू कर
मेरे जिस्म को इश्क़ का जाम कर दो

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दिखा दिखा के बदन शोहरतें मिली हैं जिन्हें
बता रहे हैं मआ'नी लिबास का हम को

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चाहतें कुछ नहीं शोहरतें कुछ नहीं
मांँ नहीं है अगर दौलतें कुछ नहीं

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सुब्ह-ए-मग़रूर को वो शाम भी कर देता है
शोहरतें छीन के गुमनाम भी कर देता है

वक़्त से आँख मिलाने की हिमाकत न करो
वक़्त इंसान को नीलाम भी कर देता है

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मूल रूप से, 'शोहरतें' समाज से मिलने वाली पहचान और प्रशंसा की बात करता है। कविता में, यह अक्सर शोहरत की क्षणभंगुरता की ओर इशारा करता है, यह दर्शाते हुए कि यह एक वरदान और बोझ दोनों हो सकता है।

'शोहरतें' का उपयोग कवि अक्सर मानव उपलब्धियों की क्षणभंगुरता पर विचार करने के लिए करते हैं। इसे आंतरिक शांति या आध्यात्मिक पूर्ति के विपरीत रखा जाता है। यह शब्द उज्ज्वल रोशनी और छायाओं की छवियों को उभारता है, सार्वजनिक प्रशंसा की द्वैतता को पकड़ता है।

कविता में, 'शोहरतें' आत्मा की उस खोज का दर्पण बनता है जो क्षणिक तालियों से परे अर्थ की तलाश करती है।