
ये तुम पर रहा कुछ भी अंजाम कर दो
मुझे शोहरतें दो या बदनाम कर दो
दिखा दो मेरे ज़ख़्म सारे जहाँ को
मेरे राज़ सारे सरे-आम कर दो
सरे बज़्म पहलू से लग कर मेरे तुम
इरादे रक़ीबों के नाकाम कर दो
मुझे ले ही आए हो बाज़ार में तो
मेरी हसरतें सारी नीलाम कर दो
मेरी उँगलियाँ अपने होंटों से छू कर
मेरे जिस्म को इश्क़ का जाम कर दो
— Rizwan malik faani















